रईस की कहानी का दूसरा पहलू देखना है तो 'अलिफ' देखें

Wednesday, February 8, 2017

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रईस की कहानी का दूसरा पहलू देखना है तो 'अलिफ' देखें

मुंबई: जिस मोहल्ले में रईस स्कूल के बैग में शराब की बोतलें सप्लाई कर बड़ा आदमी बनने की कोशिश कर रहा था, उसी मोहल्ले के किसी दूसरे कौने में अली अलिफ बे पे छोड़कर एबीसीडी पढ़कर डॉक्टर बनने की कोशिश कर रहा था. अलिफ की कहानी भी उसी तरह की परेशानियों से घिरी है, बस मंजिलें जुदा थीं.
 
ये हर किसी की कहानी है, हर किसी ने कभी ना कभी एक अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी जनरेशन से निकलकर आजकल की मॉर्डन सोसायटी में आने का सोची होगा तो उसे इसी तरह की मुश्किलों से साबका पड़ा होगा. जैगम इमाम की मूवी अलिफ आपको आपके उन दिनों की याद दिला देगी, जब आपने बेहतर कैरियर के लिए अपना स्कूल, अपना घर, अपना शहर, अपना खानदानी काम, अपना राज्य या अपना देश छोड़ा होगा.
 
एक लाइन की कहानी है अलिफ, किसी ना किसी जनरेशन को तो ये मुश्किल उठानी ही पड़ती है, वो मुश्किल इस फिल्म के हीरो अली ने झेली. अली मदरसे में पढ़ता है और पाकिस्तान से आई उसकी फूफी को ये लगता है कि मदरसे में पढ़कर वो आज की दुनियां के साथ कदमताल नहीं मिला पाएगा, वो इल्म नहीं सीख पाएगा, जो आज की दुनियां के साथ कदम से कदम मिलाने के लिए जरूरी है. अगर आप इस मैसेज को इमोशनली समझेंगे तो एक नए डायरेक्टर की मूवी में तमाम टेक्नीकल या लॉजिकल खामियों को नजरअंदाज कर देंगे.
 
 अलिफ को कॉमर्शियली बनाया भी नहीं गया है, और ये तय है कि इस मूवी को इस खास मुद्दे को उठाने की वजह से, जो आपको मूवी देखने से पहले तक मुद्दा ही ना लगे, कई अवॉर्ड मिलने तय हैं. एक दब्बू शरीफ पिता के रोल में दानिश हुसैन और उनकी बहन के रोल में नीलिमा अजीम जमे हैं.
 
तीनों बच्चों खासकर अली का रोल करने वाले साऊद मंसूरी और उसके दोस्त की चुहल फिल्म में दंगल जैसा रस बनाए रखती है, अली की क्लासमेट आहना के एक्सप्रैशंस आप नोटिस करेंगे.
 
रजा की भतीजी का रोल करने वाली एक्ट्रेस में भी काफी गुंजाइश है. फिल्म के प्रोडयूसर पवन तिवारी भी घूसखोर एलआईयू इंस्पेक्टर के छोटे रोल में फिट लगे हैं. साइड में फिल्म में आप और भी छोटे मोटे पहलुओं से रूबरू होंगे, जैसे जितने हिंदू मुसलमानों से डरते हैं, मुस्लिम परिवारों में भी वैसा ही अनजाना खौफ रहता है.
 
 
पाकिस्तान में ब्याह दी गई लड़कियों की समस्याएं, एलआईयू वालों का धंधा, मदरसों से जुड़े लोगों की सोच और एक मदरसे से आए बच्चे को लेकर एक हिंदू टीचर की सोच. अलिफ कम सिनेमा हॉल्स में लगी है, आसानी से मिलेगी नहीं, फिर भी अगर मीनिंगफुल मूवी देखने का मूड है तो जहां मिले जरूर देखें.